
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, जिससे खाड़ी देशों से तेल और गैस सप्लाई पर बहुत बुरा असर हुआ है। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने तेल बाजार को चौंकाते हुए तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर होने का ऐलान कर दिया है। ओपेक के लीडर सऊदी अरब से अंदरूनी मतभेदों के बीच यूएई ने कहा है कि वह पहली मई से ओपेक और ओपेक प्लस दोनों ही तेल संगठनों की सदस्यता छोड़ रहा है। बता दें कि ओपेक यानी ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलिश्म एक्सपोर्टिंग कंट्रीज दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों का समूह है, जो तेल उत्पादन तय करके सप्लाई और कीमतों पर असर डालता है। इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। प्रमुख सदस्य देशों में आमतौर पर सऊदी अरब, यूएई, इराक, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला, नाइजीरिया जैसे देश शामिल रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कहा है कि ओपेक से बाहर होने का फैसला देश की लंबी अवधि की आर्थिक और रणनीतिक योजना के तहत उठाया गया है। यूएई का कहना है कि अब वह अपने देश में तेल और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश तेज करेगा और ऊर्जा सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देगा। यूएई ने ऑपक और ऑपेक प्लस छोडक़र अब तेल उत्पादन पर खुद फैसला लेने का रास्ता चुन लिया है।
इसका मतलब है कि अब यूएई पर समूह के उत्पादन कोटा लागू नहीं होंगे और वह अपनी जरूरत के हिसाब से तय कर सकेगा कि कितना तेल निकालना है। इस कदम को ऑपेक के प्रमुख देश सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यूएई जैसे बड़े उत्पादक देश के अलग होने से वैश्विक तेल कीमतों, सप्लाई और ऑपेक की आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है। यूएई का ओपेक छोडऩा भारत-चीन जैसे दुनिया के बड़े तेल खरीदारों के लिए बेहद अहम खबर है। यूएई के ओपेक छोडऩे से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
ईरान बोला, ट्रंप का दबाव नहीं सहेंगे
तेहरान। ईरान ने मंगलवार को कहा कि अब अमरीका उस स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए। ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाएई-निक ने सरकारी टीवी से कहा कि वह ट्रंप का दबाव नहीं सहन करेंगे। उन्होंने कहा कि अमरीका को अपनी गलत मांगों को छोडऩा ही होगा। यह बयान उस समय आया है, जब अमरीका, होर्मुज को खोलने से जुड़े ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। अमरीका, ईरान और इजरायल के बीच फिलहाल युद्धविराम लागू है, लेकिन इस संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो बातचीत चल रही है, उसमें अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। इस बीच ईरान पहली बार होर्मुज खोलने को तैयार हो गया है। ईरान ने अमरीका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की भी अपील की है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार सुबह रूस की अपनी यात्रा खत्म करने के बाद इस्लामाबाद पहुंचे। पिछले 48 घंटों में यह उनका तीसरा पाकिस्तान दौरा है।