हिमाचल में 132 करोड़ रुपए की ठगी, 29 करोड़ की रकम फ्रीज

हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में राज्य में ऑनलाइन ठगी के मामलों में करीब 132 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी रिपोर्ट हुई है। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लगभग 29 करोड़ रुपए की राशि फ्रीज करवाई गई है। पुलिस के अनुसार राज्य में साइबर शिकायतों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। वर्ष 2023 में 8,077 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2024 में बढक़र 12,249 हो गईं। वहीं 2025 में मामलों में तेज उछाल आया और कुल 18,706 साइबर शिकायतें दर्ज की गईं। प्रदेश पुलिस का कहना है कि डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ ठग भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसे देखते हुए पुलिस ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और साइबर सेल को सक्रिय किया है।

1930 साइबर हेल्पलाइन के प्रचार के साथ स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध लेनदेन पर निगरानी रखी जा रही है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो शिमला के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने कहा कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आज ठग फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम बचाई जा सकती है। पुलिस के मुताबिक हाल के समय में फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी, व्हाट्सऐप-टेलीग्राम फ्रॉड, यूपीआई और क्यूआर कोड धोखाधड़ी तथा ओटीपी चोरी के मामले ज्यादा सामने आए हैं। तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी भी चिंता का कारण बनी हुई है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ओटीपी और यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें, अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। एएसपी नरवीर राठौर का कहना है कि समय पर दी गई सूचना ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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