केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान दो इमारतें गिर चुकी हैं, जबकि एक अन्य इमारत की छत भी ढह गयी। इन घटनाओं के बाद चंडीगढ़ प्रशासन सतर्क हो गया है। चंडीगढ़ के उपायुक्त निशांत यादव ने शहर की लगभग 100 पुरानी इमारतों की ऑडिट रिपोर्ट तलब की है। यदि ऑडिट के दौरान किसी इमारत में गंभीर संरचनात्मक खामियां पायी जाती हैं, तो उसे गिराकर दोबारा बनाया जाएगा।
चंडीगढ़ का निर्माण वर्ष 1952 में शुरू हुआ था। शहर में कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और कार्यालय हैं, जिनमें पंजाब सचिवालय, हरियाणा सचिवालय, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा पंजाब और हरियाणा विधानसभा शामिल हैं। इसके अलावा शहर में बड़ी संख्या में सरकारी आवास भी हैं, जहां विभिन्न विभागों के कर्मचारी रहते हैं।
हालांकि, समय के साथ कई सरकारी इमारतों और आवासों की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। सेक्टर-20 में कई सरकारी मकान ऐसे हैं, जिन्हें अब कर्मचारियों को आवंटित नहीं किया जाता। इनमें से कुछ पर अवैध कब्जे भी हैं। इसी तरह की स्थिति सेक्टर-24 में भी देखने को मिलती है। हाल ही में हुए भवन हादसे के बाद चंडीगढ़ प्रशासन हरकत में आ गया है। अब शहर की सभी पुरानी इमारतों का चरणबद्ध तरीके से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।
