
हिमाचल प्रदेश में नदी-नालों पर बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए वन विभाग ड्रेजिंग पॉलिसी तैयार करेगा। इसके लिए हिमाचल में कवायद आरंभ हो चुकी है। आरंभिक तौर पर वन विभाग ने कुल्लु जिला में व्यास नदी के तीन स्थानों को चिंहित कर ड्रेजिंग करने का फैसला भी लिया है। इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु मंत्रालय से सैद्धांतिक यानी स्टेज वन की मंजूरी भी मिल गई है। लिहाजा अब वन विभाग मंत्रालय को अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजने जा रहा है। बहरहाल हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार नदी-नालों में जमा गाद और मलबे को हटाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। जिससे नदी-नालों में बाढ़ से उत्पन्न होने वाले खतरे को भी कम किया जा सकेगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में नदियों में जमा गाद और मलबे को हटाने के लिए वन विभाग ने कदम उठाने आरंभ कर दिए है। आरंभिक तौर पर कुल्लु जिला की व्यास नदी पर इस योजना के तहत काम करने आरंभ कर दिया है। पता चला है कि विभाग ने कुल्लू और मनाली में तीन स्थानों को चिंहित किया है। जिनमें विभाग की ड्रेजिंग करने की योजना है। इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए फारेस्ट डिपार्टमेंट, फॉरेस्ट कारपोरेशन, खनन विभाग और संबंधित जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहा है। अहम है कि यह ऐसे स्थान है, जहां पर व्यास नदी में पूर्व में आई बाढ़ के कारण भारी मात्रा में गाद और मलबा भर गया।
और भविष्य में बाढ़ आने की स्थिति में यहां पर नुक्सान की प्रबल संभावनाएं है। चंूकि गाद और मलबे के कारण नदी का बहाव यहां पर मुड़ गया है और इसकी गहराई भी कम हो गई है। पता चला है कि विभाग की ओर से इस योजना के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को मंजूरी के लिए प्रस्ताव तैयार करके भेजा था। जिसके लिए मंत्रालय की ओर से स्टेज वन यानी योजना के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी भी प्रदान कर दी है। जिसके बाद वन विभाग प्रस्ताव से संबंधित तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अंतिम मंजूरी के लिए भारत सरकार को भेजने जा रहा है। पता चला है कि इसी सिलसिले में अधिकारियों की एक बैठक शिमला में भी हो चुकी है। ्रबहरहाल तय नियमों और पर्यावरणीय मानकों के तहत इस कार्य को करने के लिए विभाग गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। उधर, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर आफ फॉरेस्ट डा. संजय सूद का कहना है कि वन विभाग ड्रेजिंग पॉलिसी पर भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पॉलिसी बनाने को लेकर कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। डा. संजय सूद ने कहा कि आरंभिक तौर पर कुल्लू और मनाली में तीन स्थानों को चिंहित कर ड्रेजिंग करने की योजना है। जिसके लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्टेज वन की अनुमति भी मिल गई है। उन्होंने कहा कि स्टेज-टू की मंजूरी के लिए भारत सरकार को विभाग प्रस्ताव भेज रहा है। डा. संजय सूद ने कहा कि वन और खनन विभाग के साथ-साथ फारेस्ट कारपोरेशन व संबंधित जिला प्रशासन इस योजना पर संयुक्त रूप से काम कर रहा है।