
ईरान ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक ‘चाल’ है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने ‘धमकियों के साये’ में युद्धविराम विस्तार या नई बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है। अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे ‘युद्ध की कार्रवाई’ और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है।”
ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिए से इसका ‘कोई मतलब नहीं’ है और इसकी ‘कोई वास्तविक अहमियत’ नहीं है। उन्होंने इस कदम को ‘अचानक हमले’ के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।
इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।
ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमरीकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं। “पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।”
इसमें कहा गया है कि ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिए उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमरीका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमरीकी प्रशासन या इजरायल ‘आतंकवादी कदम’ उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है। इसमें कहा गया है कि अमरीका युद्ध से पीछे हट जाएगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।
अमरीकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमरीका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता। नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा। इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है।
तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा, “अमेरिका का मानना है कि ईरान की स्थिति वैसी ही है, जैसी 12 दिवसीय युद्ध के बाद थी। वर्तमान काल में हालांकि एक मौलिक अंतर है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण। अगर अमेरिका युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद रहेगा।”