
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय द्वारा उनके व्यापक टैरिफ कार्यक्रम के बड़े हिस्से को खारिज किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत दुनिया भर से होने वाले आयात पर 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही समायोजन प्रक्रिया शुरू हो गई है। अमरीका के उच्चतम न्यायालय ने श्री ट्रंप के पहले के व्यापक टैरिफ कार्यक्रम को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) राष्ट्रपति को ऐसे व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता और यह अधिकार कांग्रेस के पास है। नए टैरिफ व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 122 के तहत लगाए गए हैं और यह लगभग तुरंत प्रभावी होंगे। ये अधिकतम 150 दिनों तक लागू रहेंगे। यह कदम श्री ट्रंप के संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन घाटे और कथित अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटना है।
न्यायाधीशों को आनी चाहिए शर्म
श्री ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को बेहद निराशाजनक करार देते हुए कहा कि उनके पहले के टैरिफ के खिलाफ मतदान करने वाले न्यायाधीशों को शर्म आनी चाहिए। छह-तीन के बहुमत वाले इस फैसले से आईईईपीए के तहत पहले लगाये गये अरबों डॉलर के टैरिफ अमान्य हो गये हैं, जिससे सरकार को 130 अरब से 175 अरब डॉलर तक की राशि वापस करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत शुल्क समायोजन प्रक्रिया की शुरुआत है और अदालत द्वारा रद्द किये गये टैरिफ के स्थान पर वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े टैरिफ (धारा 232) और व्यापार उपचार उपाय (धारा 301) पहले की तरह लागू रहेंगे।
नई जांच शुरू
प्रशासन ने धारा 301 के तहत कथित अनुचित व्यापार प्रथाओं को लेकर नई जांच भी शुरू की है, जिसके परिणामस्वरूप आगे और शुल्क लगाए जा सकते हैं। श्री ट्रंप ने अपने पहले के टैरिफ उपायों को अमरीकी राजस्व बढ़ाने और शेयर बाजार को समर्थन देने वाला बताया तथा आरोप लगाया कि अदालत ने विदेशी हितों का पक्ष लिया है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत सहित विभिन्न देशों के साथ हुए हालिया द्विपक्षीय समझौते और पारस्परिक टैरिफ समायोजन नई कानूनी व्यवस्था के तहत जारी रहेंगे।